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अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की सजा पूरी, जबलपुर से किया गया डिपोर्ट

 जबलपुर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक महिला और पुरुष को सजा पूरी होने के बाद उनके देश वापस भेज दिया गया। दोनों आरोपी गुजरात के रास्ते भारत आए थे और बीते करीब दो वर्षों से जबलपुर में छिपकर रह रहे थे।


पुलिस के अनुसार, मीनारा बेगम और मोहम्मद मोसूर मार्च–अप्रैल 2023 में बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल होते हुए गुजरात के रास्ते मध्यप्रदेश के जबलपुर पहुंचे थे। यहां वे दिन में भीख मांगते थे और रात में गोरखपुर मैदान में रहते थे। उनकी भाषा और गतिविधियां संदिग्ध होने पर गोरखपुर थाना पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन वे नागरिकता से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

जांच के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश के निवासी हैं और भारत में रहने के लिए उनके पास कोई वैध कागजात नहीं हैं। इसके बाद पुलिस ने विदेशी अधिनियम की धारा 14ए के तहत मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। निचली अदालत ने दोनों को चार-चार साल की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने अपील पर घटाकर दो साल कर दिया।

दिसंबर 2025 में सजा पूरी होने के बाद दोनों को केंद्रीय जेल जबलपुर से रिहा किया गया। मीनारा बेगम को महिला सुधार केंद्र और मोहम्मद मोसूर को सिविल लाइन थाने में अस्थायी रूप से रखा गया। इसके बाद भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों के समन्वय से डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी की गई।

मध्यप्रदेश पुलिस दोनों को सड़क मार्ग से करीब 1200 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के मालदा होते हुए बांग्लादेश बॉर्डर तक लेकर गई, जहां बीएसएफ की मदद से उन्हें उनके देश वापस भेज दिया गया।

एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि दोनों आरोपी अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और पूछताछ के दौरान हिंदी भाषा भी ठीक से नहीं बोल पा रहे थे। 



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