जबलपुर। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं कविता अहिरवार के तर्कों तथा विधिक नियमो को देखते हुए न्यायमूर्ति एमएस भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि अधिनियम, 2013 की धारा 64 के अंतर्गत सागर के कलेक्टर को स्वयं प्रकरण के गुण-दोष पर निर्णय लेने या Adjudication करने का कोई अधिकार नहीं है। कलेक्टर का यह दायित्व है कि वह मामले को उचित प्राधिकारी/संदर्भ न्यायालय (Appropriate Authority) को प्रेषित करें।
सूरजपुरा जलाशय योजना के तहत अपनी सिंचित भूमि के अर्जन और उचित मुआवजे के कानूनी संघर्ष में कृषक रामनारायण को उच्च न्यायालय, जबलपुर से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने अपने हालिया आदेश के माध्यम से कलेक्टर, सागर के पूर्व आदेश को अपास्त (रद्द) करते हुए मामले को पुनः प्रेषित किया है। ग्राम पोलोह तहसील केसली, जिला सागर के निवासी एवं कृषक रामनारायण की कृषि भूमि (खसरा नंबर 89/2 रकबा 0.10 हेक्टेयर एवं खसरा नंबर 174/3 रकबा 0.61 हेक्टेयर) जल संसाधन विभाग द्वारा सूरजपुरा जलाशय योजना के तहत अर्जित की गई थी। वर्ष 2012-2013 के खसरा, पटवारी मानचित्र और स्थापित बोरवेल/मोटर पंप के बावजूद, संशोधित अधिनिर्णय में इस सिंचित भूमि को त्रुटिपूर्ण ढंग से असिंचित मानकर कम मुआवजा निर्धारित किया गया था। उचित प्रतिकर अधिनियम, 2013 की धारा 64 के तहत सक्षम प्राधिकारी को संदर्भ भेजने के लिए आवेदन किया गया था। किंतु कलेक्टर, सागर ने अपने स्तर पर ही आवेदन के गुण-दोष पर विचार करते हुए उसे खारिज कर दिया था। अतः अदालत ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए कलेक्टर, सागर को निर्देश दिए हैं कि वे याचिकाकर्ता के आवेदन पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत नए सिरे से 60 दिनों के भीतर वैधानिक निर्णय लें।
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