7 साल में सिर्फ 480 मकान तैयार: जबलपुर में PM आवास योजना की रफ्तार बेदम, 4,656 आशियाने अब भी अधूरे
जबलपुर। मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों को किफायती आशियाना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना जबलपुर शहर में कछुआ चाल का शिकार हो गई है। निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों, ठेकेदारों की मनमानी और वर्षों पुराने टेंडर रेट पर काम करने से इनकार के कारण कई बड़े आवासीय प्रोजेक्ट अधर में लटक गए हैं।
हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में योजना के तहत कुल 5,136 आवास स्वीकृत किए गए थे, लेकिन लगभग सात साल बाद भी नगर निगम केवल 480 मकान ही तैयार कर पाया है। शेष 4,656 मकान निर्माणाधीन अथवा अधूरे पड़े हैं।
सिर्फ मोहनिया और तेवर में चल रहा निर्माण
योजना के तहत मोहनिया, तिलहरी, परसवाड़ा फेज-ए व फेज-बी, तेवर और कुदवारी में MIG, LIG और EWS श्रेणी के मकान बनाए जाने थे। वर्तमान स्थिति में केवल मोहनिया और तेवर में निर्माण कार्य जारी है, वह भी बेहद धीमी गति से।
🔴 कुदवारी: ठेकेदार ने 816 मकानों का ढांचा खड़ा करने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया।
🟠 तिलहरी: 816 मकानों का लक्ष्य, लेकिन अब तक निर्माण की शुरुआत तक नहीं।
🟣 परसवाड़ा: फेज-ए और फेज-बी में कुल 1,632 मकान प्रस्तावित हैं, लेकिन काम धरातल पर नहीं उतर पाया।
🟢 मोहनिया: परियोजना में काम जारी है, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी है।
🔵 तेवर: निर्माण चल रहा है, मगर लक्ष्य की तुलना में प्रगति काफी पीछे है।
पुराने टेंडर रेट बने सबसे बड़ी बाधा
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अधिकांश टेंडर वर्ष 2017-18 की दरों पर जारी हुए थे। उस समय की तुलना में अब सीमेंट, सरिया, ईंट, रेत और मजदूरी सहित लगभग सभी निर्माण सामग्रियों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। इसी कारण कई ठेकेदार पुराने रेट पर निर्माण करने से पीछे हट रहे हैं।
करीब 350 करोड़ रुपये की इस पूरी आवासीय परियोजना में अब तक केवल 286 मकान ही बिक सके हैं। यानी निर्माण की धीमी गति के साथ-साथ मकानों की बिक्री भी निगम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
MIC ने प्रस्ताव पास किया, विभाग अब भी मिनिट्स का इंतजार कर रहा
अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (MIC) ने 3 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया था। इसके तहत निर्माण कार्य को ‘जो जहां है, जैसा है’ की स्थिति में PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर पूरा कराने का निर्णय लिया गया।
इसकी शुरुआत तिलहरी के 288 आवासों से प्रस्तावित है। निगम को इस टेंडर से करीब 18 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। योजना है कि इस राशि को बाकी अधूरे आवासीय प्रोजेक्टों को आगे बढ़ाने में लगाया जाए।
प्रोजेक्टवार स्थिति — 13 सितंबर 2026
| प्रोजेक्ट | कुल लक्ष्य | तैयार | बिके |
|---|---|---|---|
| मोहनिया | 1008 | 240 | 119 |
| तेवर | 864 | 48 | 39 |
| कुदवारी | 816 | 192 | 128 |
| तिलहरी | 816 | 0 | 0 |
| परसवाड़ा फेज-A | 864 | 0 | 0 |
| परसवाड़ा फेज-B | 768 | 0 | 0 |
| कुल | 5,136 | 480 | 286 |
सात साल बाद भी हजारों परिवारों का इंतजार
प्रधानमंत्री आवास योजना के ये प्रोजेक्ट हजारों परिवारों के अपने घर के सपने से जुड़े हुए हैं। लेकिन जिस रफ्तार से निर्माण चल रहा है, उसने योजना की समयसीमा और क्रियान्वयन दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर तिलहरी और परसवाड़ा जैसे प्रोजेक्टों में निर्माण शुरू तक न होना व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई PPP नीति और तिलहरी प्रोजेक्ट के प्रस्तावित टेंडर से नगर निगम को कितनी राहत मिलती है और वर्षों से अधूरे पड़े हजारों आवास कब तक पूरे हो पाते हैं।
“पुराने टेंडर दरों पर ठेकेदारों के काम न करने से कुछ प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। अब ‘जो जहां है, जैसा है’ की नीति के तहत तिलहरी से निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे मिलने वाली राशि अन्य परियोजनाओं में लगाई जाएगी। MIC से प्रस्ताव पास हो चुका है, मिनिट्स मिलते ही काम धरातल पर शुरू होगा।”
योजना प्रभारी, नगर निगम जबलपुर
