जबलपुर। अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को भारत से बाहर करने के लिए 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। आंदोलन की आंच तेजी से जबलपुर पहुंची और
अगस्त क्रांती 1942 को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ तिलक भूमि तलैया से तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस बीच बड़ा फुहारा घमंडी चौक पुरानी लाइब्रेरी के पास अंग्रेजी पुलिस ने फायरिंग कर दी। इसमें सेनानी गुलाब सिंह पटेल शहीद हो गए। उन्हें सिर पर गोली लगी थी। इस बीच यात्रा में शामिल गुलाब चंद्र नामदेव को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उन्हें एक साल की सजा सुनाई गई। इसकी जानकारी उनके छोटे भाई रतनचंद्र नामदेव को मिली तो उन्होंने अंग्रेजों से बदला लेने की ठानी। निवाड़गंज में रतनचंद्र नामदेव निवाड़गंज पहुंचे और अंग्रेजों की पुलिस चौकी में आग लगा दिया। भूमिगत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रतनचंद्र नामदेव के पुत्र मनोज नामदेव ने बताया कि उनके भीतर देशभक्ति का जोश था। देश व प्रदेश को गौरंवीत करने वाले दोनो स्वतंत्रता संग्राम योद्धाओं को कभी भूलाया नहीं जायेगा इस अगस्त क्रांती में उन्हे पुनः उन्हे देश व प्रदेश वासी स्मरण करते है।
